जिस मरनै यै जग डरै, सो मेरे आनंद।
कब मरिहूँ कब देखिहूँ, पूरन परमानंद॥
जिस मृत्यु से यह सारा जगत डरता है, वही मेरे लिए आनंद है। कब मरूँ और कब उस पूर्ण परमानंद के दर्शन करूँ—भक्त के लिए मृत्यु मिलन का द्वार है।
भक्ति और नाम-स्मरण