कबीरा गरब न कीजिए, कबहूँ न हँसिये कोय।
अजहूँ नाव समुद्र में, ना जाने का होय॥
अभिमान मत करो और किसी की हँसी मत उड़ाओ। तुम्हारी नाव अभी समुद्र के बीच में है, न जाने आगे क्या हो। दूसरे की दुर्दशा पर हँसने वाला अपनी बारी भूल जाता है।
अहंकार और गर्व