केतन दिन ऐसे गए, अन रूचे का नेह।
अवसर बोवे उपजे नहीं, जो नहीं बरसे मेह॥
कितने ही दिन ऐसे बीत गए जिनमें बेमन का स्नेह निभाया गया। जैसे वर्षा न हो तो बोया बीज नहीं उगता, वैसे ही भाव के बिना संबंध फलते नहीं।
काल और मृत्यु