कोई एक राखै साबधाँ, चेतनि पहरै जागि।
बस्तर बासन सूँ खिसै, चोर न सकई लागि॥
कोई विरला ही सावधान रहता है और चेतना का पहरा देकर जागता है। ऐसा व्यक्ति वस्त्र-बर्तन के मोह से हट जाता है, तब कोई चोर उसे लूट नहीं सकता।
माया और मोह