लंबा मारग, दूरि घर, विकट पंथ, बहुमार।
कहौ संतों, क्यूँ पाइये, दुर्लभ हरि-दीदार॥
मार्ग लंबा है, घर दूर है, रास्ता कठिन है और बीच में अनेक बाधाएँ हैं। हे संतो, बताओ—ऐसे में हरि के दुर्लभ दर्शन कैसे प्राप्त हों? यह साधक की व्याकुल जिज्ञासा है।
भक्ति और नाम-स्मरण