लोग भरोसे कौन के, बैठे रहें उरगाय।
जीय रही लूटत जम फिरे, मूढ़ा लूटे कसाय॥
लोग किसके भरोसे निश्चिंत होकर बैठे हैं? यमराज चारों ओर जीवन लूटता फिर रहा है और मूर्ख को कसाई की तरह लूट ले जाता है। यह प्रमाद के विरुद्ध चेतावनी है।
काल और मृत्यु