पानी केरा बुदबुदा, अस मानस की जात।
देखत ही छिप जाएगा, ज्यों सारा परभात॥
मनुष्य का जीवन पानी के बुलबुले जैसा है। देखते ही देखते वह मिट जाएगा, जैसे प्रभात होते ही तारे छिप जाते हैं। जीवन अत्यंत क्षणिक है।
काल और मृत्यु