फूटी आँख विवेक की, लखे न संत असंत।
जाके संग दस-बीस हैं, ताको नाम महंत॥
लोगों की विवेक-दृष्टि फूट गई है, वे संत और असंत में भेद नहीं कर पाते। जिसके साथ दस-बीस चेले दिख जाएँ, उसी को महंत मान लेते हैं। भीड़ को योग्यता का प्रमाण मान लेना भूल है।
साधु के लक्षण