दाया भाव हृदय नहीं, ज्ञान थके बेहद।
ते नर नरक ही जायेंगे, सुनि-सुनि साखी शब्द॥
जिनके हृदय में दया का भाव नहीं, उनका असीम ज्ञान भी थक कर व्यर्थ हो जाता है। ऐसे लोग साखी और उपदेश सुनते रहने पर भी नरक ही जाएँगे। दया के बिना ज्ञान निष्फल है।
ज्ञान और विवेक