राम पियारा छाँड़ि करि, करै आन का जाप।
बेस्या केरा पूत ज्यूँ, कहै कौन सूँ बाप॥
प्यारे राम को छोड़कर जो किसी और का जाप करता है, उसकी दशा उस बालक जैसी है जो नहीं जानता कि किसे पिता कहे। अनेक जगह भटकने से निष्ठा नहीं बनती।
भक्ति और नाम-स्मरण