सब ते लघुताई भली, लघुता ते सब होय।
जैसे दूज का चंद्रमा, शीश नवे सब कोय॥
सबसे अच्छी बात है छोटा बने रहना—लघुता से ही सब कुछ सिद्ध होता है। जैसे दूज के पतले चंद्रमा को सब सिर झुकाकर प्रणाम करते हैं, पूर्णिमा के चाँद को नहीं।
अहंकार और गर्व