समझाये समझे नहीं, पर के साथ बिकाय।
मैं खींचत हूँ आपके, तू चला जमपुर जाए॥
समझाने पर भी जो नहीं समझता और दूसरों के बहकावे में बिक जाता है—मैं तुझे अपनी ओर खींच रहा हूँ, और तू यमपुरी की ओर बढ़ा जा रहा है। हठ अंततः पतन कराता है।
काल और मृत्यु