संत पुरुष की आरसी, संतों की ही देह।
लखा जो चहे अलख को, उन्हीं में लख लेह॥
संत का शरीर ही दर्पण है। जो उस अलक्ष्य परमात्मा को देखना चाहता है, वह संतों में ही उसे देख ले। संत के आचरण में ईश्वर का प्रतिबिंब दिखाई देता है।
साधु के लक्षण