सुख सागर का शील है, कोई न पावे थाह।
शब्द बिना साधु नहीं, द्रव्य बिना नहीं शाह॥
शील सुख का सागर है, जिसकी थाह कोई नहीं पा सकता। जैसे धन के बिना कोई सेठ नहीं कहलाता, वैसे ही शब्द-ज्ञान के बिना कोई साधु नहीं होता।
साधु के लक्षण