ते दिन गये अकारथी, संगत भई न संत।
प्रेम बिना पशु जीवना, भक्ति बिना भगवंत॥
वे दिन व्यर्थ ही बीत गए जिनमें संतों की संगति न मिली। प्रेम के बिना जीवन पशु के समान है और भक्ति के बिना भगवान नहीं मिलते।
भक्ति और नाम-स्मरण