झूठे सुख को सुख कहै, मानता है मन मोद।
जगत चबेना काल का, कुछ मुख में कुछ गोद॥
लोग झूठे सुख को ही सुख कहते हैं और मन उसी में प्रसन्न रहता है। पर यह सारा जगत काल का चबेना है—कुछ उसके मुँह में है और कुछ गोद में रखा है।
काल और मृत्यु