तेरा साईं तुझमें, ज्यों पहुपन में बास।
कस्तूरी का हिरन ज्यों, फिर-फिर ढूँढ़त घास॥
तेरा स्वामी तुझमें ही है, जैसे फूल में सुगंध बसती है। पर तू उसे बाहर खोजता फिरता है—ठीक वैसे ही जैसे कस्तूरी-मृग अपनी ही नाभि की गंध घास में ढूँढ़ता है।
उपदेश और चेतावनी