उज्ज्वल पहरे कापड़ा, पान-सुपारी खाय।
एक हरि के नाम बिन, बाँधा यमपुर जाय॥
उजले वस्त्र पहनना और पान-सुपारी खाना—यह सब ठाठ किस काम का? एक हरि-नाम के बिना मनुष्य बँधकर यमपुरी ही जाता है। बाहरी सज-धज मुक्ति नहीं देती।
भक्ति और नाम-स्मरण