उत ते कोई न आवई, पासू पूछूँ धाय।
इतने ही सब जात है, भार लदाय लदाय॥
उस लोक से कोई लौटकर नहीं आता कि दौड़कर उससे हाल पूछूँ। यहाँ से तो सब अपने कर्मों का भार लादे चले ही जा रहे हैं। यही जीवन का एकतरफा सत्य है।
उपदेश और चेतावनी