यह तन जालों मसि करों, लिखों राम का नाउं।
लेखनि करूँ करंक की, लिखी-लिखी राम पठाउं॥
इस देह को जलाकर स्याही बना लूँ और उससे राम का नाम लिखूँ। हड्डियों की कलम बनाकर लिख-लिखकर राम को संदेश भेजूँ। यह विरह की चरम तीव्रता है।
भक्ति और नाम-स्मरण