अंदेसड़ा न भाजिसी, सदै सो कहियां।
के हरि आयां भाजिसी, कै हरि ही पास गयां॥
मन की यह चिंता कहने भर से नहीं मिटेगी। यह तभी दूर होगी जब या तो हरि स्वयं आ जाएँ, या मैं ही हरि के पास पहुँच जाऊँ। मिलन के बिना बेचैनी नहीं जाती।
भक्ति और नाम-स्मरण