इस तन का दीवा करौं, बाती मेल्यूँ जीव।
लोही सींचो तेल ज्यूँ, कब मुख देख पठिउं॥
इस शरीर का दीपक बनाऊँ, जीव को बाती बनाऊँ और रक्त को तेल की तरह सींचूँ—तब कहीं जाकर प्रियतम का मुख देख पाऊँ। भक्ति में सर्वस्व होम करने का भाव।
भक्ति और नाम-स्मरण