आग जो लागी समुद्र में, धुआँ न प्रकट होय।
सो जाने जो जरमुआ, जाकी लाई होय॥
समुद्र में लगी आग का धुआँ बाहर दिखाई नहीं देता। उस विरह की जलन को वही जानता है जो स्वयं उसमें जल चुका है। भीतर की पीड़ा बाहर से नहीं दिखती।
प्रेम और विरह