आपा भेटियाँ हरि मिलै, हरि मेल्या सब जाइ।
अकथ कहाणी प्रेम की, कह्या न कोउ पत्याइ॥
अहंकार का त्याग करने पर हरि मिलते हैं और हरि मिल जाएँ तो सब कुछ मिल जाता है। प्रेम की यह कहानी अकथनीय है—कहने पर कोई विश्वास ही नहीं करता।
अहंकार और गर्व