जेते तारे रैणि के, तेतै बैरी मुझ।
धड़ सूली सिर कंगुरै, तऊ न बिसारौ तुझ॥
रात के जितने तारे हैं, उतने ही मेरे शत्रु हैं। धड़ सूली पर हो और सिर कँगूरे पर टँगा हो, तब भी मैं तुझे न भूलूँ। निष्ठा की चरम घोषणा।
उपदेश और चेतावनी