बूँद पड़ी जो समुद्र में, ताहि जाने सब कोय।
समुद्र समाना बूँद में, बूझै बिरला कोय॥
बूँद समुद्र में समा जाए—यह तो सब जानते हैं। पर समुद्र स्वयं बूँद में समा जाए, इस रहस्य को कोई विरला ही समझता है। जीव का ब्रह्म में और ब्रह्म का जीव में होना यही है।
उपदेश और चेतावनी