ब्राह्मण केरी बेटिया, मांस शराब न खाय।
संगति भई कलाल की, मद बिना रहा न जाए॥
जो कभी मांस-मदिरा छूती तक न थी, कलाल की संगति में पड़कर उसके बिना रह ही नहीं पाती। संगति स्वभाव को पूरी तरह पलट देती है।
सत्संग और संगति