बुगली नीर बिटालिया, सायर चढ़या कलंक।
और पखेरू पी गये, हंस न बोवे चंच॥
बगुले ने पानी जूठा कर दिया और सरोवर पर कलंक लग गया। दूसरे पक्षी तो पी गए, पर हंस ने उसमें चोंच तक नहीं डाली। श्रेष्ठ जन दूषित को स्वीकार नहीं करते।
सत्संग और संगति