चहुँ दिसि पाका कोट था, मंदिर नगर मझार। खिरकी खिरकी पाहरू, गज बंदा दरबार॥
चहुँ दिसि ठाढ़े सूरमा, हाथ लिये हथियार। सबही यह तन देखता, काल ले गया मात॥
चारों ओर पक्का किला था और नगर के बीच महल। हर खिड़की पर पहरेदार तैनात थे, दरबार में हाथी बँधे थे और चारों ओर हथियारबंद योद्धा खड़े थे। सब देखते ही रह गए और काल इस शरीर को मात देकर ले गया। सुरक्षा का कोई प्रबंध काल को नहीं रोक सकता।
काल और मृत्यु