चर्चा करूँ तब चौहटे, ज्ञान करो तब दोय।
ध्यान धरो तब एकिला, और न दूजा कोय॥
चर्चा करनी हो तो चौराहे पर, ज्ञान की बात हो तो दो लोग पर्याप्त हैं। पर ध्यान धरना हो तो अकेले ही—वहाँ दूसरा कोई नहीं चाहिए।
सत्संग और संगति