हरिया जाने रूखड़ा, जो पानी का गेह।
सूखा काठ न जान ही, केतुउ बूड़ा मेह॥
हरा वृक्ष ही पानी का महत्त्व जानता है। सूखी लकड़ी को कितनी भी वर्षा में डुबो दो, वह कुछ नहीं जानती। जिसका हृदय जीवित है, वही उपदेश ग्रहण करता है।
उपदेश और चेतावनी