लकड़ी कहै लुहार की, तू मति जारे मोहि।
एक दिन ऐसा होयगा, मैं जारूँगी तोहि॥
लकड़ी लुहार से कहती है—तू मुझे मत जला, एक दिन ऐसा आएगा जब मैं तुझे जलाऊँगी। जो आज दूसरे को कष्ट देता है, कल उसी की बारी आती है।
काल और मृत्यु