इहि उदर के कारणे, जग पाच्यो निस जाम।
स्वामी-पणौ जो सिरि चढ़यो, सिर यो न एको काम॥
इस पेट के कारण सारा जगत रात-दिन खपता रहता है। और जिसके सिर पर गुरु होने का अहंकार चढ़ गया, उससे एक भी सच्चा काम नहीं बना।
गुरु महिमा