स्वामी हूवा सीतका, पैलाकार पचास।
राम-नाम काठें रह्या, करै सिषां की आंस॥
गुरु बनने की होड़ ऐसी लगी कि पचासों खड़े हो गए। राम-नाम तो एक ओर धरा रह गया और वे केवल शिष्यों से मिलने वाली भेंट की आशा लगाए बैठे हैं।
भक्ति और नाम-स्मरण