कलि का स्वामी लोभिया, पीतलि घरी खटाइ।
राज-दुबारा यों फिरै, ज्यूँ हरिहाई गाइ॥
कलियुग का गुरु लोभी हो गया है, पीतल को खटाई से चमकाकर सोना बताता है। वह राजदरबार के चक्कर ऐसे काटता है जैसे खेत उजाड़ने वाली गाय।
गुरु महिमा