कामी लज्जा ना करै, न माहें अहिलाद।
नींद न माँगै साथरा, भूख न माँगे स्वाद॥
कामी को लज्जा नहीं आती और न भीतर सच्चा आनंद रहता है। जैसे गहरी नींद बिछौना नहीं माँगती और सच्ची भूख स्वाद नहीं—वैसे ही तीव्र वासना विवेक नहीं देखती।
मन और संयम