ज्ञानी मूल गवाइयाँ, आपण भये करना।
ता थैं संसारी भला, मन में रहै डरना॥
अहंकारी ज्ञानी ने अपनी मूल पूँजी ही गँवा दी, क्योंकि वह स्वयं को कर्ता मानने लगा। उससे तो वह सांसारिक व्यक्ति भला है जिसके मन में कम से कम डर तो बना रहता है।
मन और संयम