परनारी राता फिरैं, चोरी बिढ़ता खाहिं।
दिवस चारि सरसा रहै, अति समूला जाहिं॥
जो पराई स्त्री में आसक्त फिरते हैं और चोरी का खाते हैं, वे चार दिन फलते-फूलते दिखते हैं, पर अंत में जड़ सहित नष्ट हो जाते हैं।
उपदेश और चेतावनी