जप-तप दीसैं थोथरा, तीरथ व्रत बेसास।
सूवै सैंबल सेविया, यौ जग चल्या निरास॥
जप-तप थोथे दिखाई देते हैं और तीर्थ-व्रत का भरोसा भी व्यर्थ। जैसे तोता सेमल के फल की आस में बैठा रहता है और खाली हाथ लौटता है, वैसे ही यह जग निराश चला जाता है।
पाखंड और आडंबर