जिसहि न कोई विसहि तू, जिस तू तिस सब कोई।
दरिगह तेरी साइयाँ, जा मरूम कोइ होइ॥
जिसका कोई नहीं, उसका तू है; और जिसका तू है, उसका सब कोई है। हे स्वामी, तेरा दरबार ऐसा है जहाँ हर कोई स्वीकार पाता है।
उपदेश और चेतावनी