कबीर मारू मन कूँ, टूक-टूक है जाइ।
विष की क्यारी बोइ करि, लुणत कहा पछिताइ॥
मन को ऐसे मारूँ कि वह टुकड़े-टुकड़े हो जाए। विष की क्यारी बोकर काटते समय पछताने से क्या लाभ? बोने के समय ही सावधानी चाहिए।
मन और संयम