कबीर पढ़ियो दूरि करि, पुस्तक देइ बहाइ।
बावन आषिर सोधि करि, ररै ममैं चित्त लाइ॥
पढ़ने का अहंकार दूर करो और पोथियाँ बहा दो। बावन अक्षरों में से बस 'र' और 'म' को शुद्ध करके मन में बसा लो—राम-नाम ही पर्याप्त है।
भक्ति और नाम-स्मरण