मैं जान्यूँ पाढ़िबो भलो, पाढ़िबा थे भलो जोग।
राम-नाम सूं प्रीती करि, भल भल नींयो लोग॥
मैं समझता था पढ़ना अच्छा है, फिर लगा पढ़ने से योग अच्छा है। पर अंत में जाना कि राम-नाम से प्रीति करने वाले ही सबसे भले निकले।
भक्ति और नाम-स्मरण