करता दीसै कीरतन, ऊँचा करि करि तुंड।
जाने-बूझै कुछ नहीं, यों ही अंधा रुंड॥
मुँह ऊँचा करके जोर-जोर से कीर्तन करता दिखाई देता है, पर जानता-समझता कुछ नहीं। ऐसा व्यक्ति बिना सिर के अंधे धड़ के समान है।
अहंकार और गर्व