खेत ना छोड़े सूरमा, जूझे दो दल मोह।
आशा जीवन मरण की, मन में राखें नोह॥
सच्चा वीर रणभूमि नहीं छोड़ता, चाहे दोनों ओर से मोह के दल घेर लें। वह जीने-मरने की आशा मन में नहीं रखता। साधना में भी ऐसी ही अडिगता चाहिए।
काल और मृत्यु