माया तो ठगनी बनी, ठगत फिरे सब देश।
जा ठग ने ठगनी ठगो, ता ठग को आदेश॥
माया ठगिनी बनकर सारे देश में सबको ठगती फिरती है। जिस ठग ने इस ठगिनी को ही ठग लिया, उस ठग को मेरा प्रणाम। माया को जीतने वाला ही सच्चा विजेता है।
माया और मोह