मैं-मैं बड़ी बलाइ है, सकै तो निकसौ भाजि।
कब लग राखौ हे सखी, रूई लपेटी आगि॥
यह 'मैं-मैं' बड़ी विपत्ति है, हो सके तो इससे भाग निकलो। हे सखी, रूई में लपेटी आग को कब तक सँभालकर रखोगी? अहंकार अंततः सब जला देता है।
अहंकार और गर्व