पंडित पढ़ि गुनि पचि मुये, गुरु बिना मिलै न ज्ञान।
ज्ञान बिना नहिं मुक्ति है, सत्त शब्द परनाम॥
पंडित पढ़-पढ़कर और गुनकर खप गए, पर गुरु के बिना ज्ञान नहीं मिला। ज्ञान के बिना मुक्ति नहीं—इसलिए सत्य शब्द को प्रणाम है।
ज्ञान और विवेक