पूत पियारौ पिता कों, गौहनि लागो घाइ।
लोभ-मिठाई हाथ दे, आपण गयो भुलाइ॥
पुत्र पिता को प्यारा है और पीछे-पीछे दौड़ा चला आता है। पिता उसके हाथ में लोभ रूपी मिठाई थमाकर स्वयं खिसक जाता है। माया ऐसे ही जीव को बहलाकर भटका देती है।
माया और मोह