राम नाम चीन्हा नहीं, कीना पिंजर बास।
नैन न आवे नींद रे, अलग न आवे भास॥
राम-नाम को पहचाना नहीं और इस देह रूपी पिंजरे में ही बसे रहे। ऐसे में न आँखों में चैन की नींद आती है, न भीतर कोई प्रकाश उतरता है।
भक्ति और नाम-स्मरण